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पुश्तैनी जमीन का बंटवारा कैसे करें

पुश्तैनी जमीन का बंटवारा कैसे करें pushtaini jamin ka batwara : अक्सर पुश्तैनी ज़मीन को लेकर भाई-भाई, भाई-बहन या परिवार के अन्य सदस्यो के बीच लड़ाई-झगडे या वाद-विवाद होते रहते है। ऐसे में ये निर्धारित करना कि पुश्तैनी जमीन का बंटवारा कैसे करें ये बहुत जरूरी हो जाता है। क्या आपके परिवार में भी यही समस्या है और आप इसका समाधान ढूंढ रहे हैं ?

तो आप बिल्कुल सही जगह पहुंच चुके हैं। क्योंकि यहां हम आपको बताने वाले हैं पुश्तैनी जमीन का बंटवारा करने का सही तरीका क्या है। इसके अलावा यहां आपको यह भी पता चलेगा कि बिहार राज्य में पुश्तैनी जमीन के बंटवारे को लेकर कौन सी व्यवस्थाएं बनाई जा रही है।

यहां आपको पुश्तैनी जमीन क्या है से लेकर पुश्तैनी जमीन का बंटवारा कैसे करें? और पुश्तैनी जमीन का बंटवारा किन लोगों (सदस्यो) में हो सकता है आदि की संपूर्ण जानकारी मिलेगी। तो आइए सबसे पहले जानते हैं कि पुश्तैनी जमीन क्या होती है।

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पुश्तैनी जमीन क्या है ?

पुश्तैनी जमीन का मतलब आप जानते ही होंगे लेकिन फिर भी आपकी जानकारी के लिए हम बता दें कि पुश्तैनी जमीन पुरखों के द्वारा मिली जाने वाली वह विरासत है, जो चार पीढ़ियों से आपके पास होती है और इसमें आपका अधिकार जन्म से ही होता है। लेकिन ये अन्य प्रारूपों से थोड़ा अलग होता है। क्योंकि यहाँ पर पुश्तैनी जमीन में मालिक के मरने के बाद सीधे ज़मीन आपके नाम पर नहीं होती। इसके लिए कुछ कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।

आइए जानते हैं कि पुश्तैनी जमीन पर किनका किनका अधिकार होता है।

पुश्तैनी जमीन पर किनका अधिकार होता है ?

पुश्तैनी जमीन पर पिता और बच्चों का बराबर का हक होता है। जिसमें पिता के हक़ में आने वाले हिस्से का बटवारा बच्चे आपस में करते है। ध्यान देने वाली बात यह है कि पुश्तैनी जमीन पर केवल बेटों का ही नहीं बल्कि बेटियों का भी अधिकार होता है।

हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) कानून 2005 के तहत ये फैसला लिया गया था, कि पुश्तैनी संपत्ति में बेटों के साथ-साथ बेटियों को भी बराबर का दर्जा दिया जाएगा। अर्थात बेटियां भी पुश्तैनी ज़मीन में बराबर की हक़दार है। कानून में संशोधन से पहले सिर्फ परिवार के पुरुषों और बेटों को ही पुश्तैनी जमीन पर अधिकार दिया जाता था। लेकिन हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 1956 के प्रावधान 6 में संशोधन करके पुश्तैनी ज़मीन में बेटियों को भी उत्तराधिकारी होने का दर्जा मिल चुका है।

आइए अब हम आपको पुश्तैनी जमीन से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातें भी बताते हैं, जो आपको भविष्य में सहायता प्रदान कर सकती है।

पुश्तैनी जमीन की महत्वपूर्ण बातें ?

आज के जमाने में अक्सर पुश्तैनी जमीन को लेकर वाद विवाद होते रहते हैं जो आम बात हो चुकी है। वहीं मामले कई बार बहुत ज्यादा गंभीर हो जाते हैं जिसका निपटारा आवश्यक हो जाता है। तो ऐसे में आपको इन महत्वपूर्ण बातों का ज्ञान होना चाहिए।

आइए हम आपको बताते हैं कि पुश्तैनी जमीन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें क्या है –

  • सबसे जरूरी बात जो आपको पता होनी चाहिए वो ये है कि यदि आपकी कोई पुश्तैनी जमीन है तो उसमें हिस्से का अधिकार आपको जन्म के साथ मिल जाता है।
  • यदि पुश्तैनी ज़मीन को बेचा जा रहा है तो उसमें केवल बेटों का ही नहीं बल्कि बेटियों का भी अधिकार होता है।
  • अगर पुश्तैनी ज़मीन को घर का कोई सदस्य बेचना चाहता है, तो उसे पुश्तैनी जमीन के अन्य हिस्सेदारों की राय लेनी पड़ेगी और उनकी सहमति के बिना ज़मीन बेचने का अधिकार नहीं होगा।
  • पुश्तैनी ज़मीन मे अधिकार पाने के लिए कोर्ट मे बंटवारे का मुकदमा दायर किया जा सकता है।
  • पुश्तैनी ज़मीन उस प्रॉपर्टी को कहा जाता है जिसका बटवारा जॉइंट फैमिली के सदस्यों के बीच नहीं हुआ है।
  • एक बार यदि आपकी पुश्तैनी ज़मीन का बंटवारा हो जाता है, तो इस ज़मीन के हिस्सेदार इसके मालिक बन जाते है अर्थात ये उनकी खुद कमाई हुई संपत्ति बन जाती है।
  • पुश्तैनी ज़मीन पर हर एक हिस्सेदार का अधिकार होता है।

अब यह महत्वपूर्ण बातें तो आपको पता चल गई। चलिए अब हम आपको बताते हैं कि बिहार राज्य में जमीन के बंटवारे को लेकर क्या नियम बनाए गए हैं।

बिहार राज्य में जमीन के बंटवारे का नियम

बिहार राज्य में पुश्तैनी जमीन को लेकर लगातार वाद- विवाद बढ़ते जा रहे हैं जिनकी वजह भी काफी छोटी है अर्थात छोटी- मोटी बातों को लेकर पुश्तैनी जमीन के ऊपर विवाद खड़ा हो रहा है। जिससे कानून पर बहुत ज्यादा असर पड़ रहा है।

इस बढ़ते विवाद को देखते हुए बिहार राज्य सरकार ने एक योजना बनाई है, जिसके तहत जमीन का बंटवारा किया जा सकता है। जिसके अंतर्गत आपसी सहमति को कानूनी रूप दिया जाएगा।

इसके अंतर्गत यह योजना बनाई जानी है कि जिस प्रारूप को परिवार के सदस्यो का ज्यादा बहुमत मिलेगा उसके अनुसार ही पुश्तैनी जमीन का बटवारा किया जाएगा। आइए इसे उदाहरण के तौर पर समझते हैं।

मान लीजिये कि एक परिवार में 8 सदस्य है, यदि 8 में से 5 सदस्य पुश्तैनी जमीन का बंटवारा करना चाहते हैं, तो उसमे सहमति पत्र तैयार करके कानूनी रूप से स्वीकार कर लिया जाएगा।

पुश्तैनी जमीन का बंटवारा करने के क्या तरीके है ?

हमारे देश में मुख्य रूप से 3 तरीकों से किसी भी जमीन का बंटवारा किया जाता है। लेकिन जब बात आती है पुश्तैनी जमीन के बंटवारे की, तब यह तय करना थोड़ा मुश्किल हो जाता है कि इसका बंटवारा किस तरीके से करना चाहिए।

आइए जानते हैं इन 3 तरीकों के बारे में जिसमें हम यह समझने की कोशिश करेंगे कि कौन सा तरीका पुश्तैनी जमीन के बंटवारे के लिए सही है।

1. आपसी सहमति से बटवारा

आपसी सहमति के द्वारा जब किसी पुश्तैनी जमीन का बंटवारा किया जाता है, तब बंटवारे के समय तो किसी प्रकार की कोई अड़चन नहीं आती। लेकिन भविष्य में इसके विपरीत परिणाम देखने को मिल सकते हैं।

मान लीजिए कि आपने आपसी सहमति से किसी पुश्तैनी जमीन का बंटवारा कर लिया। लेकिन आगे चलकर किसी सदस्य को इस बंटवारे में आपत्ति नजर आने लगी तो ऐसे में सारे सदस्यों के बीच विवाद की स्थिति खड़ी हो सकती है। जिससे आपसी सहमति से हुए बंटवारे की कोई वैल्यू नहीं रह जाती।

इसलिए किसी भी पुश्तैनी जमीन का आपसी बटवारा आपसी सहमति के साथ करना उचित नहीं है।

अगर हम बात करें बिहार राज्य के नई योजना की जिसके तहत बहुमत के आधार पर जमीन का बंटवारा किया जाना है तो इसकी कानूनी व्यवस्था पहले से वहां मौजूद है। अर्थात यदि किसी परिवार के 7 सदस्यों में 4 सदस्य पुश्तैनी जमीन का बंटवारा चाहते हैं तो उस प्रारूप में कानूनी रूप से उसे स्वीकार कर लिया जाता है। लेकिन जहां इस तरह की कानूनी व्यवस्था नहीं है वहां आपसी सहमति से पुश्तैनी जमीन का बंटवारा करना उचित प्रक्रिया नहीं है।

2. पंचायत की सहायता से जमीन का बंटवारा

पंचायत की सहायता से पुश्तैनी जमीन का बंटवारा आसानी से किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए कुछ आवश्यक शर्तों का पालन जरूरी है। आइए इसे एक उदाहरण के तौर पर समझते हैं –

मान लीजिये कि एक परिवार में अगर पांच में से तीन भाई पंचायत में पुश्तैनी ज़मीन का बटवारा चाहते हैं, तो वो मान्य होगा। लेकिन इस बटवारे में किसी के साथ भी अनुचित नहीं होना चाहिए अर्थात हर हिस्सेदार को उसका हक़ दिया जाना चाहिए।

लेकिन इस प्रक्रिया के दौरान पंचायत मे लिए समिति के मुखिया, पन्चो और सभी सदस्यो का होना जरूरी है। इस प्रक्रिया के दौरान एक पन्च लाइन तैयार की जाती है, जिसमें पंचों के साथ आधे से अधिक हिस्सेदार का भी पंच लाइन में पर हस्ताक्षर करना बेहद जरूरी होता है। इसके आधार पर हिस्सेदारों के नाम पर  अलग-अलग जमाबंदी निर्धारित कर दी जाती है।

बिहार में इस प्रकार से बंटवारे की प्रक्रिया को कानूनी मान्यता दी जा चुकी है, जिसमें ये निर्णय लिया गया है कि इसके अंतर्गत परिवार के किसी भी सदस्य को दूसरे को हिस्सा लेने से रोकने का अधिकार नहीं होगा और  पंचायत प्रतिनिधियों के हस्ताक्षर के बिना ये प्रक्रिया मान्य नहीं होगी। अतः इस प्रक्रिया के माध्यम से आप आसानी से अपने पुश्तैनी जमीन का बंटवारा बिना किसी लड़ाई झगडे के कर सकते है|

आइए अब हम आपको इसके अगले चरण में लेकर चलते हैं और पुश्तैनी जमीन के बंटवारे के सबसे अच्छे तरीके के बारे में बताते हैं।

3. पुश्तैनी जमीन का रजिस्ट्री बंटवारा

यदि आप अपनी पुश्तैनी जमीन का सही और सटीक रूप से बंटवारा करना चाहते हैं, तो इसके लिए रजिस्ट्री बंटवारा सबसे उपयुक्त माना जाता है।

आप अपने पुश्तैनी जमीन पर अपना हक़ पाने के लिए अदालत की सहायता ले सकते हैं। जिसमें अदालत आवश्यक दस्तावेजों के अनुरूप पुश्तैनी जमीन का बराबर बंटवारा करके पुश्तैनी जमीन के हिस्सेदारों को उनका हक दिलवाता है।

एक बार कानूनी रूप से पुश्तैनी जमीन का बंटवारा हो जाने के पश्चात भविष्य में कभी भी आपको किसी प्रकार के वाद-विवाद में नहीं पड़ना पड़ेगा।

पुश्तैनी जमीन के बंटवारे के लिए क्या – क्या दस्तावेज लगेंगे ?

चलिए हम आपको बताते हैं कि पुश्तैनी जमीन के बंटवारे के लिए आपको किन आवश्यक दस्तावेजों की जरूरत पड़ेगी –

  • Death Certificate( उस सदस्य का सर्टिफिकेट जिसके हिस्से की ज़मीन का बटवारा किया जा रहा है। जैसे कि पिता या दादा)
  •  Affidavit ( शपथ पत्र)
  •  Ration Card (राशन कार्ड)
  • Land Registry (जमीन रजिस्ट्री)
  • Other Land Related Documents (जमीन से सम्बंधित अन्य दस्तावेज)
  • Mobile No (मोबाइल नंबर)
  • Email ID (ईमेल आईडी)
  •  Aadhar Card (आधार कार्ड)

अगर आपके पास ही सारे दस्तावेज मौजूद है, तो आप आसानी से रजिस्ट्री करके पुश्तैनी जमीन का बंटवारा कर सकते हैं।

जमीन बंटवारा नियम क्या है

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नामांतरण कैसे चेक करे ऑनलाइन

सामान्य प्रश्न (FAQs)

पुश्तैनी ज़मीन के बटवारे का सबसे उपयुक्त तरीका क्या है ?

यदि आप पुश्तैनी जमीन का बंटवारा करना चाहते हैं, तो रजिस्ट्री करके बटवारा कर सकते हैं। क्योंकि अदालत में पुश्तैनी जमीन के बंटवारे के बाद भविष्य में आपको किसी भी प्रकार के विवाद का सामना नहीं करना पड़ेगा।

पुश्तैनी ज़मीन का बटवारा पन्चायत की सहायता से करने के लिए किसकी आवश्यकता होती है ?

पुश्तैनी जमीन बंटवारे में पंचायत की प्रक्रिया के दौरान पंचायत मे लिए समिति के मुखिया, पन्चो और सभी सदस्यो का होना जरूरी है। इस प्रक्रिया के दौरान एक पन्च लाइन तैयार की जाती है, जिसमें पंचों के साथ आधे से अधिक हिस्सेदार का भी पंच लाइन में पर हस्ताक्षर करना बेहद जरूरी होता है। 

पुश्तैनी ज़मीन की रजिस्ट्री के दौरान किन दस्तावेजों की आवश्यकता होती है ?

पुश्तैनी ज़मीन के बटवारे के लिए यदि आप अदालत में रजिस्ट्री कराते हैं, तो आपको Death Certificate     (उस सदस्य का सर्टिफिकेट जिसके हिस्से की ज़मीन का बटवारा किया जा रहा है, जैसे कि पिता या दादा), Affidavit, Ration Card, Land Registry, Other Land Related Documents, मोबाइल नंबर, Email ID, Aadhar Card आदि की आवश्यकता होगी।

सामान्य Conclusion

दोस्तों आज के इस आर्टिकल में हमने जाना कि पुश्तैनी जमीन की रजिस्ट्री कैसे करें ? इस आर्टिकल के अंदर हमने आपको पुश्तैनी जमीन के बारे में ए टू जेड जानकारी दी है। अगर आपको यह जानकारी अच्छी लगी हो तो इस आर्टिकल को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक शेयर जरूर करें।

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