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जमीन का एग्रीमेंट कैसे होता है

जमीन का एग्रीमेंट कैसे होता है jameen ka agreement kaise hota hai : जमीन का एग्रीमेंट एक कानूनी प्रक्रिया है। इसके द्वारा दो लोगों के बीच एक सहमति बनती है, कि वह किसी पर्टिकुलर जमीन को किसी अन्य व्यक्ति को निश्चित दिन के लिए निश्चित पैसे पर दे रहे हैं। साथ ही कुछ नियम और शर्तें भी होती हैं जिनका उल्लंघन करने पर एग्रीमेंट को खतम भी किया जा सकता है।

जमीन का एग्रीमेंट सामान्य तौर पर किसी वकील के द्वारा करवाया जाता है। हालांकि कुछ राज्यों में इसके लिए कोर्ट की भी आवश्यकता पड़ती है। फिलहाल इस आर्टिकल में आज हम जानेंगे कि “जमीन का एग्रीमेंट कैसे करें” अथवा “जमीन का एग्रीमेंट कैसे करवाते हैं।”

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जमीन का एग्रीमेंट क्या है ?

जमीन का एग्रीमेंट एक प्रकार का कानूनी डॉक्यूमेंट होता है, जिसमें किसी जमीन की खरीदी बिक्री या फिर जमीन को भाड़े पर देने की सारी जानकारी होती है। इसे सहमति पत्र भी कहते हैं।

अगर आप किसी जमीन को बेच रहे हैं और कोई व्यक्ति जमीन को ले रहा है, तो दोनों व्यक्ति के बीच जब सहमति बन जाती है। तो ऐसी अवस्था में एग्रीमेंट का इस्तेमाल किया जाता है अथवा आप किसी व्यक्ति को मकान भाड़े पर दे रहे हैं और सामने वाला व्यक्ति मकान भाड़े पर ले रहा है, तो जो सहमति होती है। उसके लिए भी एग्रीमेंट तैयार करवाया जाता है, जिसके अंदर विभिन्न बातों का उल्लेख होता है।

जमीन का एग्रीमेंट कैसे होता है ?

कानूनी प्रक्रिया होने के नाते जमीन के एग्रीमेंट की कार्यवाही में स्टांप पेपर का इस्तेमाल किया जाता है। जिस पर आवश्यक जानकारियों को लिखा जाता है और दोनों ही पक्षों के हस्ताक्षर भी करवाए जाते हैं। जमीन का एग्रीमेंट आखिर कैसे होता है, इसके बारे में नीचे जानकारी दी गई है।

  • जमीन का एग्रीमेंट करवाने के लिए सबसे पहले कम से कम ₹500 का स्टांप पेपर खरीदना होता है। अगर ₹500 से कम का स्टांप पेपर होगा तो एग्रीमेंट रिलीव नहीं होगा। इसलिए कम से कम ₹500 का स्टांप पेपर अवश्य खरीदें।
  • एग्रीमेंट में आपको सबसे पहले उस व्यक्ति की सारी जानकारी लिखनी होती है, जिसे आप मकान बेच रहे हैं या फिर जिसे आप मकान भाड़े पर दे रहे हैं।
  • उदाहरण के तौर पर अगर आप कोई प्लॉट ले रहे हैं तो उसका पहले से अलॉटमेंट लेटर होता है, वह कब रजिस्टर्ड हुआ था उसकी जानकारी अथवा कोई जमीन लेते हैं तो जमीन की पूरी डिटेल आती है या जमीन किसके नाम पर है, जिन जिन के नाम पर होती है उसकी पूरी जानकारी लिखी जाती है।
  • इसके अलावा जमीन का आकार कितना है और जमीन की लंबाई चौड़ाई कितनी है इसके बारे में भी स्टांप पेपर पर लिखा जाता है।
  • सबसे आवश्यक बात यह है कि कितनी कीमत में जमीन की खरीदारी हो रही है या फिर बिक्री हो रही है और सामने वाली पार्टी कितना पेमेंट कर रही है, इसकी भी जानकारी लिखनी होती है।
  • इसके अलावा दोनों ही पक्षों को यह देखना होता है कि जिस जमीन को भाड़े पर दिया जा रहा है अथवा जिस जमीन की खरीदी अथवा बिक्री हो रही है उस पर कोई विवाद तो नहीं है।
  • जमीन पर कोई लोन है या नहीं इसके बारे में भी जानकारी प्राप्त की जाती है। अगर कोई लोन है तो पहले उसे भरने के लिए कहा जाता है।
  • एग्रीमेंट हो जाने के पश्चात उसे नोटराइज करवाना आवश्यक होता है, जिसके लिए दो गवाह लगते हैं और उन गवाहों के हस्ताक्षर और आधार कार्ड की फोटो भी लगती है।
  • जो भी एग्रीमेंट होता है वह हमेशा जमीन खरीदने वाले के पास होता है। जमीन बेचने वाले के पास एग्रीमेंट की फोटोकॉपी होती है।
  • सारी जानकारियों को लिखने के पश्चात एग्रीमेंट में दोनों ही पार्टी के हस्ताक्षर भी निश्चित जगह में होते हैं। अगर कोई पार्टी पढ़ी-लिखी नहीं है, तो वह अपने अंगूठे का निशान भी लगा सकती है।

नोट : याद रखें कि हर राज्य में जमीन का एग्रीमेंट करवाने की प्रक्रिया अलग-अलग होती है और कुछ राज्यों में आपसी सहमति से ही जमीन का एग्रीमेंट स्टैंप पेपर पर बन जाता है। वहीं कुछ राज्यों में जमीन का एग्रीमेंट करने के लिए किसी वकील की आवश्यकता होती है।

इसलिए अगर आपके राज्य में वकील का सिस्टम है, तो आपको वकील की मौजूदगी में और गवाहों की मौजूदगी में जमीन का एग्रीमेंट करवाना चाहिए। ताकि किसी भी प्रकार के विवाद में वकील की सहायता आप ले सकें।

जमीन एग्रीमेंट में क्या होता है ?

जमीन एग्रीमेंट में आपके द्वारा जिस वस्तु को बेचा जा रहा है अथवा खरीदा जा रहा है अथवा जिस वस्तु को या फिर प्रॉपर्टी को भाड़े पर दिया जा रहा है, उससे संबंधित सारी जानकारी होती है। जमीन एग्रीमेंट में दोनों ही पक्ष के नाम होते हैं साथ ही दोनों ही पक्ष का पूरा एड्रेस भी लिखा हुआ होता है और दोनों ही पक्ष के हस्ताक्षर भी होते हैं।

अगर कोई पक्ष अनपढ़ है, तो ऐसी अवस्था में हस्ताक्षर की जगह पर अंगूठे का निशान लगाया जाता है। इसके अलावा जमीन एग्रीमेंट में तारीख भी डाली जाती है और यह बताया जाता है कि जमीन एग्रीमेंट कौन सी तारीख को हुआ है साथ ही अगर गवाह की आवश्यकता होती है तो जमीन एग्रीमेंट में गवाहों के नाम भी लिखे जाते हैं और उनके भी सिग्नेचर या फिर अंगूठे के निशान को करवाया जाता है। मुख्य तौर पर एग्रीमेंट दो प्रकार का होता है प्रॉपर्टी एग्रीमेंट और रेंट एग्रीमेंट।

जमीन एग्रीमेंट में कितना एडवांस देना होता है ?

एग्रीमेंट में किसी भी जमीन की कीमत का तकरीबन 10 परसेंट पैसे एडवांस देना होता है। हालांकि यह आवश्यक नहीं है, आप 5% पैसा भी एडवांस दे सकते हैं। जो भी पैसा आप एडवांस देंगे उस पैसे को आप को जमीन के एग्रीमेंट में अवश्य दर्ज करना होता है।

मान लीजिए कि अगर आप कोई 1 लाख की जमीन खरीद रहे हैं, तो एग्रीमेंट में जो भी आप अग्रिम राशि देख रहे हैं उसे अवश्य लिखना होता है ताकि बाद में अगर व्यक्ति अपनी बातों से मुकर जाता है, तो एग्रीमेंट के तहत जो भी नियम कानून है, उसके तहत व्यक्ति के खिलाफ कोर्ट में आवश्यक कार्रवाई की जा सके।

एग्रीमेंट होने के बाद प्रॉपर्टी मालिक रजिस्ट्री ना करे तो क्या करें ?

अगर आपके द्वारा एग्रीमेंट की सहमति से किसी जमीन की खरीदारी की जा रही है या फिर किसी चीज को भाड़े पर लिया जा रहा है और एग्रीमेंट का डाटा भी बन करके तैयार हो गया है। परंतु जमीन का मालिक एग्रीमेंट तैयार होने के बावजूद भी रजिस्ट्री नहीं कर रहा है या फिर आपको जमीन भाड़े पर नहीं दे रहा है तो आप उसके खिलाफ अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन में धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज करवा सकते हैं।

अथवा उसके खिलाफ आप कोर्ट में कंप्लेंट भी कर सकते हैं। ऐसा करने पर अगर सामने वाला व्यक्ति अपना पक्ष प्रस्तुत करने में कमजोर पड़ेगा तो कोर्ट के द्वारा आपके पक्ष में फैसला सुनाया जाएगा।

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सामान्य प्रश्न FAQ

जमीन का एग्रीमेंट किसके द्वारा किया जाता है ?

किसी वकील के द्वारा अथवा कोर्ट के द्वारा जमीन का एग्रीमेंट किया जाता है। इसमें स्टाम्प पेपर में एग्रीमेंट से सम्बंधित सभी बातें लिखी हुई होती है। फिर इसे नोटरी के समक्ष पेश किया जाता है।

क्या जमीन का एग्रीमेंट करने के लिए गवाहों की आवश्यकता होती है ?

ये अलग – अलग राज्य के नियम के अनुसार निर्भर करता है। कुछ राज्यों में गवाहों की आवश्यकता होती है। इसके साथ ही एग्रीमेंट के अलग – अलग प्रकार के अनुसार भी गवाह की जरुरत पड़ती है।

जमीन एग्रीमेंट का उल्लंघन होने पर क्या करें ?

जमीन एग्रीमेंट का उल्लंघन होने पर पुलिस कंप्लेंट करें अथवा कोर्ट में केस करें। ऐसे स्थिति में एग्रीमेंट पेपर आपके पास होना चाहिए।

सारांश –

जमीन का एग्रीमेंट कैसे होता है, इसकी पूरी जानकारी स्टेप by स्टेप बहुत सरल तरीके से यहाँ बताया गया है। अब कोई भी व्यक्ति बिना किसी परेशानी के एग्रीमेंट पेपर तैयार करके एग्रीमेंट करवा पाएंगे। अगर इसके सम्बन्ध में कोई अन्य जानकारी चाहिए तो नीचे कमेंट बॉक्स में बता सकते है। भू अभिलेख एवं भू नक्शा से सम्बंधित ऐसे ही नई – नई जानकारी पाने के लिए गूगल सर्च बॉक्स में सर्च करें – bhulekhbhunaksha.in धन्यवाद !

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